Ved Manjari - वेद मंजरी ( DR. RAMNATH VEDALANKAR )

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महर्षि दयानन्द की याद आते ही , उसके साथ एक और नाम की याद स्वतः हो आती है , वह नाम है ” वेद ” । दयानन्द यदि देह है तो वेद उसका आत्मा है । दयानन्द के हाथ सर्वप्रथम वेद लगे । वेद क्या हाथ लगे मानो सच , झूठ की कसौटी हाथ लग गई । दयानन्द ने उद्घोष दिया कि ” वेद सब सत्यविद्याओं का पुस्तक है , जो इस पर खरा उतरे उसे ले लो शेष सब छोड़ दो । व्यर्थ के व्यामोह में न पड़ो । ” महर्षि दयानन्द की प्रेरणा से ही प्रस्तुत इस उपहारत्रयी में तीन प्रकार के वेद – मन्त्रों का संग्रह प्रस्तुत किया जा रहा है । एक ऐसा कि जिसे वर्ष के हर महीने आचरण में लाया जाए । दूसरा ५३ मन्त्रों का संग्रह , जिसका उपदेश प्रति सप्ताह जीवन में चरितार्थ किया जाए और तीसरा ऐसा कि जो वर्ष के प्रत्येक दिन के लिए उपयुक्त बैठता हो । ऐसे ३६५ मन्त्रों की हृदयहारी व्याख्या का नाम ” वेद – मञ्जरी ” है । पाठक इस मञ्जरी के एक – एक पराग का मधुपान करें और अपने हृदय – स्रोत को भरें । समय मिले तो अन्यों को भी वेद – मधु का पान करायें ।

लेखक परिचय – प्रस्तुत ग्रन्थ के लेखक आचार्य डॉ ० रामनाथ वेदालंकार वैदिक साहित्य के ख्याति प्राप्त मर्मज्ञ विद्वान् हैं । आपका जन्म ७ जुलाई १६१४ को फरीदपुर , बरेली , ( उ ० प्र ० ) में माता श्रीमती भगवती देवी एवं पिता श्री गोपालराम के घर हुआ । शिक्षा गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार में हुई । इसी संस्था में ३८ वर्ष वेद – वेदांग , दर्शनशास्त्र , काव्यशास्त्र , संस्कृत साहित्य आदि विषयों के शिक्षक एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष रहते हुए समय – समय पर आप कुलसचिव तथा आचार्य एवं उपकुलपति का कार्य भी करते रहे । वैदिक एवं संस्कृत साहित्य की सेवा के उपलक्ष्य में आप कई पुरस्कारों एवं सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं ।

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DHAI MORCHE KA CHAKRAVYOOH

'अंकुर आर्य'आर्ष गुरुकुलीय प्रणाली में निष्णात विशारद व आचार्य हैं जिन्होने दर्शन, उपनिषद्, स्मृति, नीति, श्रीगीताजी, रामायण व महाभारत का अध्ययन कर विश्वभर में वैदिक ग्रंथों का प्रचार प्रसार किया। उन्होने 2013 में सरकारी नौकरी का लालच छोड गृह त्याग कर सम्पूर्ण भारत का भ्रमण किया व योग, अध्यात्म तथा गुरुकुलीय शिक्षा हेतु महर्षि दयानंद सरस्वती जी के सम्बोधन "वेदों की ओर लौटो" का संदेश लोगों तक पहुंचाया। गुरुकुलीय शिक्षा के बाद उन्होंने इस्लाम, इसाईयत का सनातन ग्रंथों से तुलनात्मक अध्ययन किया तथा हिन्दुओं के विरुद्ध चल रहे 'कन्वर्ज़न सिंडिकेट' को तोडने के लिए सीधे शास्त्रार्थ का बिगुल‌ फूंका तथा स्वामी श्रद्धानंद जी के शुद्धि आंदोलन को आगे बढाने हेतु अपनी आहुति देना आरम्भ किया।
जाकिर नाइक द्वारा वेद, उपनिषद्, गीताजी व रामायण पर लगाए सभी आक्षेपों का एक ही बार में निरुत्तर करने वाला जवाब देकर उन्होंने मनुस्मृति का अध्यापन किया जिसके द्वारा मनुस्मृति के विषय में फैलाई जा रही सभी भ्रांतियों का निवारण किया।
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह के खादिमों द्वारा 'सोफिया कॉलेज ब्लैकमेल कांड' पर पहली बार लोगों को पुनः जागृत करने के कारण राजस्थान सरकार द्वारा सन् 2020 में अभियोग भी चलाया गया। लेकिन उनका यह कार्य निरंतर जारी है।
तुलनात्मक अध्ययनव भ्रांति निवारण के इसी युद्ध में उनकी पहली कृति "ढाई मोर्चे का चक्रव्यूह" आपके हाथों में है जो देश के भीतर छिपे देश के दुश्मनों को पहचानने में सबसे बडा अस्त्र सिद्ध होगी

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