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Sanatan Haat

सोलह संस्कार: पूर्ण व्यक्तित्व का आधार (Solah Sanskar)

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कोई हमारी माँ - बहन को सताए अथवा कोई विदेशी हमारे देश पर हमला करे तो हमारा खून खौलने लगता है । आक्रान्ता को उसके कुकर्म का दण्ड दिये बिना हमें चैन नहीं मिलता । ऐसा क्यों होता है ? इसलिए कि आक्रन्ता का कुकर्म हमारे संस्कारों पर आघात पहुँचाता है । माँ - बहनों की लाज बचाना , मातृभूमि को स्वर्ग से भी ऊँचा मानना हमारे संस्कारों में रच - बस चुका है । इस भूमण्डल पर भारत ही ऐसा देश है मनुष्य को मनुष्यता के साँचे में ढाला जाता है । हमें बचपन से ही यह पाठ पढ़ाया जाता है कि दूसरों के स्वर्ग को माटी समझो , सबकी माँ - बहनों को आदरणीय मानो , सबको सहारा दो , मानव हो तो मानव मात्र से प्यार करो । अपने इन्हीं संस्कारों के कारण भारत समूचे संसार का गुरु रहा है । केवल सोलह संस्कारों ने हमें देवताओं की पदवी से सुशोभित किये रखा है । यह छोटी - सी पुस्तिका हमारे पूर्ण व्यक्तित्व को निखार सकती है । परिवार के सदस्यों को इसे पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे तो सभी के जीवन फुलवारियों के समान महक उठेंगे ।