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Sanatan Haat

महर्षि दयानन्द के कुछ हस्तलिखित पत्र (दो भागो में) - Maharshi Dayanand Ke Kuch Hastlikhit Patra (Part 1)

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महर्षि दयानन्द सरस्वती के पत्रों के संग्रहकर्ता रहे हैं- पं ० लेखराम आर्यपथिक , स्वामी श्रद्धानन्द , मा ० लक्ष्मण शर्मा , पं ० चमूपति , देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय , पं ० घासीराम , महाशय मामराज आर्य , पं ० भगवद्दत्त , पं ० युधिष्ठिर मीमांसक , प्राध्यापक धर्मवीर | इन सभी के प्रयासों को एक साथ संकलित कर दो भागों में प्रस्तुत किया गया है । महर्षि दयानन्द गृहत्याग के अनन्तर निरन्तर भ्रमणशील रहे । सन १८६० से १८६३ तक गुरु विरजानन्द के अन्तेवासी के रूप में व्यतीत अध्ययनकाल इसका अपवाद है । महर्षि १८६३ में मथुरा से आगरा चले गये थे । यहाँ से महर्षि का उपदेशकाल प्रारम्भ होता है । महर्षि यावज्जीवन वाणी के साथ ही पत्रों द्वारा जिज्ञासुओं का शंका समाधान करते रहे । आगरा से प्रारम्भ हुआ पत्रव्यवहार का यह क्रम जोधपुर प्रवास ( अक्टूबर सन् १८८३ ) तक चलता रहा । इस संग्रह में प्रस्तुत पत्रव्यवहार के अध्ययन से स्पष्ट है कि छोटी से छोटी वस्तु से लेकर कितनी ही महत्त्वपूर्ण बात क्यों न हो महर्षि सभी के प्रति समानभाव से सचेष्ट रहते थे । पाठक इनमें महर्षि के जीवन के उन पहलूओं से परिचित होंगे जो अब तक लिखी महर्षि की जीवनियों में नहीं मिलते ।