Skip to product information
1 of 2

Sanatan Haat

पूर्वाहुति काव्य - Purnahuti Kavya

Regular price Rs. 100.00
Regular price Sale price Rs. 100.00
Sale Sold out
Shipping calculated at checkout.
डॉ० द्वारिका प्रसाद अग्रवाल द्वारा रचित 'पूर्वाहुति' काव्य को एक आधुनिक ग्रन्थ को महाकाव्य कह सकते हैं। इसमें किसी व्यक्ति की सम्पूर्ण जिन्दगी का आख्यान नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय संस्कृति की अक्षुण्ण धुरी के चारों ओर विनाश और उसके परित्राण की एक राष्ट्रीय जागृति की लीला चलती है। उसमें पूरा राष्ट्र अपनी राष्ट्रीय चेतना के उन्माद में समर्पण करता है और भौगोलिक गुलामी के बाद भी सांस्कृतिक गुलामी में फंसना नहीं चाहता

पूरा राष्ट्र ही आहुति का सामूहिक पात्र बन जाता है और अंग्रेजी क्रूरता का विरोध करता है। दो राष्ट्रीय संस्कृतियों का यह राष्ट्रीय युद्ध कई दशकों तक चलता है जो महाभारत और रामायण युद्ध से समय और क्षेत्र की दृष्टि से व्यापक है। पूरे राष्ट्र की सीमा में लड़ा जाने वाला यह युद्ध आधुनिक युद्ध का एक विश्वव्यापी स्वरूप प्रस्तुत करता है ।

राष्ट्रीयता के परिप्रेक्ष्य में जीवन-मूल्यों की में तलाश बनता हुआ यह काव्य - ग्रन्थ 'भारतीय संस् कृति का रचनात्मक संश्लेष' कहा जा सकता है । इसमें सांस्कृतिक इतिहास का मूल्यांकन हरदम वर्तमान के उत्कर्ष के सन्दर्भ में हुआ है। निश्चय ही इस प्रकार के काव्य-ग्रन्थ से समकालीन राष्ट्रीयता के विलोप का अवसान होगा। पाठक स्वयं अपना निर्णय दें ।

- डॉ० हरिश्चन्द्र मिश्र