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Sanatan Haat

धर्म और विज्ञान - Dharm aur Vigyan

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आज मानवी जीवन विफलता से ग्रस्त हुआ है। साक्षर सुशिक्षित, सभ्य और सुसंस्कृत माने जाने वाले लोग भी यथार्थ ज्ञान के अभाव में व्यर्थ ही भ्रमित हो रहे हैं । 'धर्म' और 'विज्ञान' इन दो अवधारणाओं के कारण सारे विश्व में भयानक वाद छिड़ गया है ।

एक ओर तथाकथित धार्मिक लोगों ने धर्म-तत्त्व को अन्धविश्वास में जकड़ दिया है और विज्ञान के सत्य को नकारा है तो दूसरी और आधुनिक विज्ञान–वेत्ताओं ने धर्म एवम् अध्यात्म जैसे तत्त्वों को नकारा है। 'धर्म' और 'विज्ञान' ये दोनों तत्त्व वास्तव में परस्पर पूरक हैं। धर्म के अभाव में विज्ञान एवं विज्ञान के अभाव में धर्म भी 'अज्ञान' एवम् 'अविद्या' है।

महर्षि दयानन्द सरस्वती ने इन दोनों तत्त्वों का सुसंगत समन्वय करके विश्व को मानवता की शिक्षा दी है। उन्होंने धर्म के क्षेत्रों में चल रहे गड़बड़

घोटाले को अपने सत्य वैदिक दर्शन के आधार पर रोका है।

इस पुस्तक में श्री डॉ० सुग्रीव बळीराम काळे जी ( ब्रह्ममुनि) ने धर्म और विज्ञान' इन दोनों अवधारणाओं का मार्मिक विवेचन किया है ।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही सृष्टि के विभिन्न मूलतत्त्वों की एवम् अध्यात्म की मीमांसा करनी चाहिए ।