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Sanatan Haat

देश के दुलारे - Desh Ke Dulare (For Student)

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संस्कृत का एक श्लोक कहता है- ' वह माता शत्रु है , वह पिता वैरी है , जो बालक - बालिका को शिक्षा नहीं दिलाता । ' किंतु , शिक्षा या पढ़ाई - लिखाई कैसी हो ? बेमतलब की मार - धाड़ से भरपूर कहानियाँ कितनी भी रोमांचक हों , फूल - जैसे बच्चों को रास्ते से भटका देती हैं । बच्चों के लिए बहुत सावधानी से पुस्तकों का चुनाव करना चाहिए । देश की आजादी के लिए अपने जीवन भेंट चढ़ानेवालों के संघर्ष पर ध्यान दें , तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं । यदि रोमांचक साहित्य ही बच्चों को प्रिय है , तो उन्हें क्रान्तिकारियों की जीवनियाँ पढ़ने को दें । बच्चे हों या प्रौढ़ हों , यदि उन्हें देश के दुलारे बनाना तो यह पुस्तक उन्हें चाव से भेंट करें ।