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Sanatan Haat

उदेश्य सर्वस्व (Uddeshya sarvasva)-

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त्वदीयं वस्तु महर्षे ! तुभ्यमेव समर्पये । इस लोकोक्ति के आधार पर आर्यसमाज के 10 उद्देश्यों का संगति सूत्र लेकर लेखक इस लघु पुस्तिका में इन उद्देश्यों की विस्तृत व्याख्या कर रहे हैं ।

इस लघु पुस्तिका के मुख्य पृष्ठ पर बने चित्र उपकार - तुला में संगति - सूत्र की एक झांकी लें । उपकार - तुला के दो पलड़े हैं - एक है व्यक्ति – पालड़ा , है दूसरा समाज - पालड़ा । व्यक्ति - पलड़े में प्रथम पांच उद्देश्य रखें हैं । समाज - पलड़े में पिछले चार उद्देश्य रखे हैं । पहले पांच उद्देश्यों का लक्ष्य व्यक्ति निर्माण है , जबकि पिछले चार उद्देश्यों का लक्ष्य समाज निर्माण है ।

व्यक्ति और समाज के निर्माण और सामंजस्य में ही विश्व निर्माण और संसार का उपकार संभव है । पाठक वृन्द चित्र में इसकी झांकी लें और लघु पुस्तिका का अध्ययन मनन करें |